
आज दिनाँक 17 अगस्त, 2026 को चैम्बर हाऊस, काशीपुर में ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ऊर्जा मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा पेपर एवं पैकेजिंग उद्योगों मे ऊर्जा की बचत हेतु अदिती योजना (असिस्टेंस इन डेप्लॉयिंग एनर्जी एफिशिएंसी टेक्नोलॉजीज इन इंडस्ट्रीज एंड इस्टैब्लिशमेंट) के अन्तर्गत उद्योगों को दी जा रही सहायता विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ऊर्जा दक्षता ब्यूरो, ऊर्जा मन्त्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के संयुक्त निदेशक, श्री समीर कुमार गुप्ता एवं सहायक प्रबन्धक (तकनीकी), श्री अनिमेष अग्रवाल उपस्थित थे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उद्योगों को ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने, ऊर्जा की खपत एवं लागत को कम करने तथा उपलब्ध वित्तीय सहायता का लाभ उठाने के लिए जागरूक करना था। कार्यशाला में अदिती योजना के विभिन्न प्रावधानों, पात्रता मानदंड, वित्तीय सहायता एवं आवेदन प्रक्रिया के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यशाला में एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) के सहायक प्रबंधक (तकनीकी), श्री अनिमेष अग्रवाल ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अदिती योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अदिती एक सेंट्रल सेक्टर स्कीम है, जिसके अंतर्गत पात्र एमएसएमई को ऊर्जा दक्षता से संबंधित परियोजनाओं के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज अनुदान की सुविधा उपलब्ध है। योजना के तहत छोटे और सूक्ष्म उद्यमों को 5 प्रतिशत तथा मध्यम उद्यमों को 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान तीन वर्षों की अवधि तक प्रदान किया जाता है। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के लिए 10 लाख से अधिक एवं 15 करोड़ तक के टर्म लोन का प्रावधान है।
उपस्थित उद्यमियों को योजना के तहत इन्वेस्टमेंट ग्रेड एनर्जी ऑडिट, ऊर्जा दक्ष तकनीकों के चयन, परियोजना क्रियान्वयन, मॉनिटरिंग एंड वेरिफिकेशन तथा ब्याज अनुदान के दावे की प्रक्रिया के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई।
कार्यशाला में यह भी बताया गया कि योजना का लाभ लेने के लिए एमएसएमई इकाई के पास वैध उद्यम रजिस्ट्रेशन नंबर होना आवश्यक है तथा प्रस्तावित ऊर्जा दक्षता उपायों से 10 प्रतिशत से अधिक ऊर्जा बचत प्राप्त होना अपेक्षित है। पात्र इकाइयां निर्धारित वाणिज्यिक बैंकों एवं अन्य पात्र वित्तीय संस्थानों/एनबीएफसी के माध्यम से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
अदिती योजना के अंतर्गत एमएसएमई को केवल वित्तीय सहायता ही नहीं, बल्कि ऊर्जा ऑडिट, तकनीकी मार्गदर्शन, तकनीकों के चयन, परियोजना क्रियान्वयन, रिपोर्टिंग एवं वित्तीय सहायता के दावे आदि में भी हैंडहोल्डिंग सपोर्ट उपलब्ध कराया जाता है।

कार्यशाला में ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) के संयुक्त निदेशक, श्री समीर कुमार गुप्ता ने उपस्थित उद्योग प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपनी औद्योगिक इकाइयों में ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने की संभावनाओं का आकलन करें तथा एडीटीटीई योजना के अंतर्गत उपलब्ध वित्तीय एवं तकनीकी सहायता का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि ऊर्जा दक्ष तकनीकों को अपनाने से उद्योगों को ऊर्जा लागत में कमी लाने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने तथा सतत एवं ऊर्जा-कुशल औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर केजीसीसीआई पेपर यूनिट चैप्टर के चेयरमैन, श्री संजीव जिंदल, उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूरेडा) की परियोजना अधिकारी सुश्री चांदनी बंसल, श्री अतुल अग्रवाल, श्री जगमोहन सिंह, श्री आलोक भारद्वाज, श्री विनय प्रताप राव, श्री प्रदीप सिंह, श्री मोहम्मद दानिश, श्री आर. सी. पांडे, श्री संदीप कुमार, श्री प्रतीक कुमार, श्री अर्पित सिंघल, श्री सौरभ गुप्ता सहित क्षेत्र के अन्य उद्योग प्रतिनिधि उपस्थित थे।



