
दिनाँक: 21.11.2025
दिनाँक 20 नवम्बर, 2025 को कुमायूँ गढ़वाल चैम्बर ऑफ कॉमर्सएण्ड इण्डस्ट्री (केजीसीसीआई) द्वारा भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी) के सहयोग से एमएसएमई उद्योगों के विकास के लिए लीन मैन्युफैक्चरिंग एवं सिडबी की कम ब्याज दरों पर ऋण योजनाओं पर एक वर्कशॉप का आयोजन किया गया। इस अवसर पर योजनाओं की जानकारी देने के लिए सिडबी, रूदपुर शाखा के सहायक महाप्रबन्धक, श्री ज्ञानेश कुमार, सिडबी के उत्तराखण्ड क्लस्टर मैनेजर, श्री देवकी नन्दन, राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद के डायरेक्टर एवं ग्रुप हैड श्री आशुतोष माकूप, एमएमएमई, डीएफऑ-हल्द्वानी के सहायक निदेशक, श्री संदीप प्रियदर्शी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का संचालन केजीसीसीआई के कोषाध्यक्ष, श्री अंकित बंसल ने किया।

कार्यक्रम में उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए केजीसीसीआई के निवर्तमान अध्यक्ष, श्री अशोक बंसल ने कहा कि यह सेमिनार क्षेत्र में एमएसएमई के विकास एवं संवर्धन को प्रोत्साहित करने के लिए केजीसीसीआई एवं सिडबी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है। केजीसीसीआई द्वारा उद्योगों के विकास एवं मार्गदर्शन हेतु समय-समय पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिससे लाभ उठाकर क्षेत्र के उद्योग दिन प्रतिदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो रहे हैं तथा अन्य प्रान्तों के उद्योगों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

सिडबी के सहायक महाप्रबन्धक, श्री ज्ञानेश कुमार द्वारा अवगत कराया गया कि सिडबी की एमएसएमई एवं उद्यम विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। एमएसएमई के विकास हेतु सिडबी, केजीसीसीआई के साथ मिलकर कार्य कर रहा है तथा एमएसएमई के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। सिडबी नई इकाई स्थापित करने तथा कार्यरत इकाईयों के विस्तारीकरण हेतु मशीनरी/उपकरणों की खरीद के लिए ऋण उपलब्ध कराता है। ग्रीनफील्ड परियोजनाओं के लिए भी ऋण उपलब्ध कराता है तथा बैंक द्वारा वर्किंग कैपिटल हेतु ओवरड्राफ्ट की सुविधा भी उपलब्ध कराता है।
उन्होंने सुझाव दिया कि भविष्य में होने वाले कार्यक्रमों की वीडियो रिकॉर्डिंग करायी जानी चाहिए ताकि जो उद्यमी किसी कारणवश सेमिनार/कार्यक्रम में नहीं आ पाते हैं, उन्हें ईमेल के माध्यम से वह जानकारी भेजी जा सके ताकि वे भी उसका पूरा लाभ उठा पायें।

नेशनल प्रोडक्टिविटी कौंसिल के डायरेक्टर, श्री आशुतोष माक्युप द्वारा अवगत कराया गया कि एमएसएमई कम्पटीटिव लीन स्कीम, एमएसएमई मंत्रालय, भारत सरकार की एक पहल है इसका मकसद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना है भारत सरकार के नियमानुसार लीन मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों को एमएसएमई में अपनाया जाएगा ताकि उत्पादन में बर्बादी कम हो, दक्षता बढ़े और लागत में कमी आए।इसका उद्देश्य उद्योगों में वेस्टेज को कम करना- जैसे कि अनावश्यक इन्वेंटरी, समय की बर्बादी तथा जगह का समुचित रूप से उपयोग करना है।इसके साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता में मूलभूत सुधार लाना है तथा उसमें निरन्तर सुधार करते रहना तथा उत्पादनकी प्रक्रिया को सरल, मजबूत एवं टिकाऊ बनाना है। उन्होंने कहा कि इसके मार्गदर्शन के लिए लीन कन्सल्टेंट के माध्यम से एमएसएमई को बेसिक, माध्यमिक एवं एडवांस स्तर पर लीन तकनीक अपनाने के लिए गाईड किया जाएगा जिसका 80 प्रतिशत तक का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

एमएएसएमई, हल्द्वानी के सहायक निदेशक, श्री संदीप प्रियदर्शा ने कहा कि जेड सर्टीफिकेशन भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य एमएसएमई की क्वालिटी, प्रोडक्टिविटी और पर्यावरण हितैशी उत्पादन में सुधार लाना है। इसका मुख्य मन्त्र है- जीरो डिफेक्ट-जीरो इफेक्ट। इसके अन्तर्गत उद्योगों को जानकारी प्रदान की जाती है कि उद्योगों में निर्मित उत्पादों की क्वालिटी बेहतरीन हो ताकि बाजार में उसकी डिमाण्ड बढ़े तथा उत्पादन से पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव पड़े। जेड तीन श्रेणियों में प्रदान किया जाता है- 1. ब्रोंज- बेसिक क्वालिटी और सिस्टम्स के लिए दिया जाता है। 2. सिल्वर- यह एडवांस क्वालिटी सिस्टम के लिए प्रदान किया जाता है। 3. होल्ड- यह इंटरनेशनल लेवल की क्वालिटी और पर्यावरण मानकों के लिए प्रदान किया जाता है। इसके लिए सरकार द्वारा 70 से 80 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है तथा एससी/एसटी एवं महिला उद्यमियों के लिए और भी अधिक सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है। इससे ऊर्जा और संसाधनों की बचत होती है, सप्लाई चेन और बड़े उद्योगों में अवसर बढ़ते हैं। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है तथा उत्पादन लागत में कमी आती है।
श्री देवकी नन्दन ने कहा कि उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वे ऋण से लेकर विभिन्न प्रकार के सर्टीफिकेशन हेतु कंसल्टेंसी तक की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार हैं ताकि एमएसएमई भी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

कार्यक्रम में केजीसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री रमेश कुमार मिड्ढा, श्री विकास सिंह, श्री एस के मित्तल, श्री मान सिंह, श्री ज्ञान सलेम, श्री अमित सिंगला, श्री भास्कर शर्मा, श्री जितेन्द्र गहतोड़ी, श्री देव अरोरा, श्री योगेश गुप्ता, श्री दिलीप सचान, श्री विवेक शर्मा, श्री रामगोपाल पाण्डे, श्री खुशहाल बिष्ट, श्री वैभव गोयल, श्री डी के शर्मा, श्री विनोद शर्मा, श्री अनन्त भास्कर राय, श्री संतोष कुमार, श्री शिव प्रताव तिवारी, श्री सत्यवीर सिंह, श्री प्रवीन पटेल, श्री आकाश कुमार, श्री प्रदीप कुमार आदि उपस्थित थे।



